खड़ी फसल में बीमार लगने से किसानों की फसल हो रही बर्बाद। dhan me pilapan

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कृषि खबर। धान की खड़ी फसल में फफूंदी रोग लगने से धान की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है अक्सर फफूंदी जनक रोग सितंबर अक्टूबर में प्रभाव सील होते हैं यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो एक ही 2 दिन में फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।
फफूंदी जनक रोग के लक्षण 

  1. धान की खड़ी फसल मैं पीलापन दिखाई देना।
  2. लाल धब्बे छोटे-छोटे शक्ति दिखाई देना।
  3. धान की ऊपरी हिस्से जला हुआ दिखाई देना।

इनमें से यदि धान की खड़ी फसल में कोई भी लक्षण दिखाई देता है तो समझ लेना चाहिए कि धान में फफूंद जनित रोक लगी हुई है और तुरंत ही उपचार शुरू कर देना चाहिए।
फफूंद एक सूक्ष्म जीवाणु होते हैं जो नंग्न आंखों से कभी दिखाई नहीं देते और ना ही यह कीटनाशक दवाओं से खत्म होती है।

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फफूंद जनित रोग के प्रकार
फफूंद के द्वारा धान की खड़ी फसल में लगने वाले कई रोग पाए गए हैं इनमें से मुख्य रूप से दो रोग अत्यधिक प्रभाव से होते हैं योग कुछ ही समय में फसल को बर्बाद कर देते हैं।

  1. पीला मोजेक
  2. धूलसा (blast)

रोग लगने के कारण
यह रोग होने के प्रमुख तत्व दो कारण हो सकते हैं छत्तीसगढ़ प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है जहां अधिकतर किसान धाम की खेती कर जिवकोपार्जन करते हैं। ऐसे में किसानों का फसल बर्बाद होना इसी आत्मा घात से कम नहीं है।

  • धान की फसल में सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिलने पर यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, बोरान, जस्ता, की कमी की वजह से धान में पीलापन दिखाई देता है और वह बीमारी से ग्रसित हो जाता है।
  • धान की फसल का विरलीकरण (बियासी) ना होने से जमीन ठोस (कड़ी) हो जाती है कड़ी मिट्टी में फसल को उचित मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाता जिससे वह पीला पड़ने लगता है और बीमार से ग्रसित हो जाता है।
  • अधिकतर उन फसलों पर ही यह बीमार हावी होती है जो पहले से ही कमजोर होती है आपने कभी अपने खेतों में गौर किया होगा की इस और की फसल कमजोर होती है उसी और की फसलों को बीमार पकड़ लेती है।

आशा करते हैं की इस खबर से आप सचेत होकर अपने फसल की सुरक्षा कर पाएंगे।

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राजू मरकाम